— तब (कालवाचक नित्यसम्बन्धी अव्यय); — उसमें — नपुं.अधिकरण एक.; — महाव्योम — चैतन्य का महान आकाश (अधिकरण कारक — समासगत); — जिसमें शशि (चन्द्र) और भास्कर (सूर्य) विलीन हो गए हैं (अधिकरण कारक — समासगत); — सुषुप्ति-पद के समान (अव्यय); — मूढ़, अज्ञानी (कर्ता कारक); — प्रबुद्ध, जागृत (कर्ता कारक); — हो, हो सकता है (विधिलिङ्ग, तृ.पु.एक. √अस्); — अनावृत, अनाच्छादित, पूर्ण-प्रकाशमान (विशेषण, कर्ता कारक)
तब उस महाव्योम (चैतन्य-आकाश) में, जहाँ शशि (चन्द्र) और भास्कर (सूर्य) विलीन हो चुके हैं — मूढ़ (अज्ञानी) उसे सौषुप्त-पद के समान (शून्य) अनुभव करता है, परन्तु प्रबुद्ध (जागृत) अनावृत (अनाच्छादित) रहता है।