Stanzas on the Divine Pulsation · 1.24

Stanzas on the Divine Pulsation 1.24

1.24
तामाश्रित्योर्ध्वमार्गेण चन्द्रसूर्यावुभावपि । सौषुम्नेऽध्वन्यस्तमितो हित्वा ब्रह्माण्डगोचरम् ॥२४॥
tām āśrityordhva-mārgeṇa candra-sūryāv ubhāv api | sauṣumne 'dhvany astam ito hitvā brahmāṇḍa-gocaram ||
anuṣṭubh
— उसका (स्पन्द का) आश्रय लेकर (पूर्वकालिक क्रिया-पदबन्ध) ; — ऊर्ध्व मार्ग से, ऊपर के पथ से (करण कारक — समासगत) ; — चन्द्र और सूर्य (इडा-पिङ्गला / अपान-प्राण) — द्विवचन ; — दोनों ही (पु.कर्ता द्विवचन + अव्यय) ; — सुषुम्ना नाड़ी में (अधिकरण कारक) ; — अस्त को प्राप्त, विलीन (पदबन्ध) ; — त्याग कर, छोड़कर (पूर्वकालिक अव्यय कृदन्त √हा) ; — ब्रह्माण्ड का गोचर (विषय-क्षेत्र) — कर्म कारक — समासगत

उस (स्पन्द) का आश्रय लेकर, ऊर्ध्व मार्ग से चन्द्र और सूर्य (अपान और प्राण) दोनों ही सौषुम्न मार्ग (सुषुम्ना नाड़ी) में अस्त हो जाते हैं, ब्रह्माण्ड-गोचर (विश्व-विषय) को त्याग कर।