— उस (स्पन्द) बल का अवलम्बन लेकर (पूर्वकालिक क्रिया-पदबन्ध); — मन्त्र (कर्ता कारक बहुवचन); — सर्वज्ञ-बल से सम्पन्न (कर्ता कारक बहुवचन — समासगत); — प्रवृत्त होती हैं, उद्यत होती हैं (वर्त. तृ.पु.बहु., √प्र-वृत्); — अपने नियत अधिकार (कार्य) के लिए (सम्प्रदान कारक); — यह (अर्थात् मन्त्र-गण) — पु.कर्ता एक.; — (इन्द्रिय-)करणों की भाँति (पदबन्ध); — देहधारियों के — पु.षष्ठी बहु.
उस (स्पन्द) बल का अवलम्बन लेकर सर्वज्ञ-बल से सम्पन्न मन्त्र अपने अधिकार (नियुक्त कार्य) में प्रवृत्त होते हैं — जैसे देहधारियों के लिए (इन्द्रिय-)करण प्रवृत्त होते हैं।