Stanzas on the Divine Pulsation · 3.16

Stanzas on the Divine Pulsation 3.16

3.16
सेयं क्रियात्मिका शक्तिः शिवस्य पशुवर्तिनी । बन्धयित्री स्वमार्गस्था ज्ञाता सिद्ध्युपपादिका ॥१६॥
seyaṃ kriyātmikā śaktiḥ śivasya paśu-vartinī | bandhayitrī sva-mārgasthā jñātā siddhy-upapādikā ||
anuṣṭubh
— वह — स्त्री.कर्ता एक. सर्वनाम ; — यह — स्त्री.कर्ता एक. ; — क्रियात्मिका शक्ति — क्रिया-स्वरूप शक्ति (कर्ता कारक, स्त्रीलिङ्ग — पदबन्ध) ; — शिव का — पु.षष्ठी एक. ; — पशुवर्तिनी — बद्ध जीव में प्रवृत्त (विशेषण, स्त्रीलिङ्ग — समासगत) ; — बन्धयित्री — बन्धन करने वाली (विशेषण, स्त्रीलिङ्ग) ; — स्वमार्गस्था — अपने (वास्तविक) मार्ग पर स्थित (विशेषण, स्त्रीलिङ्ग — समासगत) ; — जान ली गई, प्रत्यभिज्ञात (स्त्री.कर्ता एक. ppp √ज्ञा) ; — सिद्धि-उपपादिका — सिद्धि (पूर्णता) की प्रदाता (विशेषण, स्त्रीलिङ्ग — समासगत)

यही क्रियात्मिका (क्रिया-रूपा) शिव की शक्ति, जब पशु (बद्ध जीव) में प्रवृत्त होती है, तब बन्धन करने वाली है; (किन्तु) जब अपने (वास्तविक) मार्ग पर स्थित जान ली जाती है, तब वही सिद्धि (पूर्णता) की प्रदाता बन जाती है।