Stanzas on the Divine Pulsation · 1.23

Stanzas on the Divine Pulsation 1.23

1.23
यामवस्थां समालम्ब्य यदयं मम वक्ष्यति । तदवश्यं करिष्येऽहमिति सङ्कल्प्य तिष्ठति ॥२३॥
yām avasthāṃ samālambya yad ayaṃ mama vakṣyati | tad avaśyaṃ kariṣye 'ham iti saṅkalpya tiṣṭhati ||
anuṣṭubh
— जिस — स्त्री.कर्म एक. सम्बन्धवाचक ; — अवस्था को — स्त्री.कर्म एक. ; — समालम्बन करके, सहारा लेकर (पूर्वकालिक क्रिया) ; — जो भी — नपुं.कर्म एक. सम्बन्धवाचक ; — यह (पुरुष, प्रतिवादी) — पु.कर्ता एक. ; — मेरा — षष्ठी एक. सर्वनाम ; — (वह) कहेगा (भविष्य काल) ; — उस को — नपुं.कर्म एक. ; — अवश्य, निश्चय ही (अव्यय) ; — मैं करूँगा (भविष्य काल, उत्तम पुरुष) ; — मैं — कर्ता एक. सर्वनाम ; — इस प्रकार, ऐसा (उद्धरण-समापक अव्यय) ; — संकल्प करके, निश्चय करके (पूर्वकालिक क्रिया) ; — स्थिर रहता है, अवस्थान करता है (वर्तमान काल)

जिस अवस्था का आश्रय लेकर वह संकल्प करता है कि 'यह (पुरुष) मुझसे जो कहेगा, मैं उसे अवश्य करूँगा' — और (उसी में स्थिर) रहता है (उसी स्थिरता में स्पन्द है)।