Stanzas on the Divine Pulsation · 3.6

Stanzas on the Divine Pulsation 3.6

3.6
दुर्बलोऽपि तदाक्रम्य यतः कार्ये प्रवर्तते । आच्छादयेद्बुभुक्षां च तथा योऽतिबुभुक्षितः ॥६॥
durbalo 'pi tad ākramya yataḥ kārye pravartate | ācchādayed bubhukṣāṃ ca tathā yo 'ti-bubhukṣitaḥ ||
anuṣṭubh
— दुर्बल — कमज़ोर व्यक्ति (विशेषण, कर्ता कारक) ; — भी (अव्यय) ; — उसका (स्पन्द का) आक्रमण करके, आश्रय लेकर (पूर्वकालिक क्रिया-पदबन्ध) ; — क्योंकि, जिससे (हेत्वर्थक सम्बन्धवाचक अव्यय) ; — कार्य में (अधिकरण कारक) ; — प्रवृत्त होता है, लग जाता है (वर्तमान काल) ; — बुभुक्षा (भूख) को आच्छादित करे — दबा दे (विधिलिङ्, पदबन्ध) ; — और (अव्यय) ; — तथा, उसी प्रकार (अव्यय) ; — जो — पु.कर्ता एक. सम्बन्धवाचक सर्वनाम ; — अति-बुभुक्षित — अत्यन्त भूखा (विशेषण, कर्ता कारक)

दुर्बल भी उस (स्पन्द) का आश्रय लेकर कार्य में प्रवृत्त हो जाता है; तथा अत्यन्त भूखा भी उसी (स्पन्द) से अपनी बुभुक्षा (भूख) को आच्छादित (समाप्त) कर सकता है।