Stanzas on the Divine Pulsation · 3.5

Stanzas on the Divine Pulsation 3.5

3.5
तथा यत्परमार्थेन येन यत्र यथा स्थितम् । तत्तथा बलमाक्रम्य न चिरात्सम्प्रवर्तते ॥५॥
tathā yat paramārthena yena yatra yathā sthitam | tat tathā balam ākramya na cirāt sampravartate ||
anuṣṭubh
— तथा, उसी प्रकार (अव्यय) ; — जो (कुछ भी) — नपुं.कर्ता एक. सम्बन्धवाचक ; — परमार्थतः, परम सत्य से (करण कारक) ; — जिसके द्वारा — पु.करण एक. सम्बन्धवाचक ; — जहाँ, जिस (अवस्था) में (सम्बन्धवाचक अव्यय) ; — जैसे, जिस प्रकार (सम्बन्धवाचक अव्यय) ; — स्थित — विद्यमान (भूत कृदन्त, कर्ता कारक) ; — वह — नपुं.कर्ता एक. सर्वनाम ; — तथा, उसी प्रकार (अव्यय) ; — (स्पन्द-)बल का आक्रमण करके, आश्रय लेकर (पूर्वकालिक क्रिया-पदबन्ध) ; — अचिर में, शीघ्र (अव्यय) ; — सम्प्रवर्तित होता है, घटित होता है (वर्तमान काल)

वैसे ही जो जिस प्रकार, जिसके द्वारा, जहाँ परमार्थतः स्थित है — वह उसी प्रकार (स्पन्द) बल को आक्रमण करके (आश्रित होकर) शीघ्र ही प्रकट हो जाता है।