Stanzas on the Divine Pulsation · 3.7

Stanzas on the Divine Pulsation 3.7

3.7
अनेनाधिष्ठिते देहे यथा सर्वज्ञतादयः । तथा स्वात्मन्यधिष्ठानात्सर्वत्रैवं भविष्यति ॥७॥
anenādhiṣṭhite dehe yathā sarva-jñatādayaḥ | tathā svātmany adhiṣṭhānāt sarvatraivaṃ bhaviṣyati ||
anuṣṭubh
— इस (स्पन्द तत्त्व) के द्वारा — नपुं.करण एक. ; — अधिष्ठित देह में — (स्पन्द से) शासित शरीर में (अधिकरण कारक) ; — जैसे, जिस प्रकार (सम्बन्धवाचक अव्यय) ; — सर्वज्ञता आदि (शक्तियाँ) — कर्ता कारक बहुवचन — समासगत ; — तथा, उसी प्रकार (अव्यय) ; — अपने आत्मा में अधिष्ठान से — स्वयं पर अधिकार पाने से (पदबन्ध, अपादान कारक) ; — सर्वत्र, हर जगह (अव्यय) ; — इस प्रकार, ऐसा ही (अव्यय) ; — होगा (भविष्यत् काल, तृ.पु.एक. √भू)

जैसे इस (स्पन्द) से अधिष्ठित देह में सर्वज्ञता आदि (शक्तियाँ) प्रकट होती हैं, वैसे ही अपने आत्मा में (स्पन्द के) अधिष्ठान से सर्वत्र ये ही (शक्तियाँ) प्रकट होंगी।