— जिससे, क्योंकि (अपादान-सूचक सम्बन्धवाचक); — सर्वमय — सब कुछ जिसमें समाहित है (कर्ता कारक — समासगत); — जीव — व्यक्तिगत आत्मा (कर्ता कारक); — सब भावों के उद्भव से (अपादान कारक — समासगत); — उसके संवेदन (बोध) के रूप से (करण कारक — समासगत); — तादात्म्य की प्रतिपत्ति (एकत्व-अनुभूति) से (अव्यय)
क्योंकि जीव सर्वमय (सबका सार-रूप) है — सब भाव उसी से उत्पन्न होते हैं — उसके संवेदन-रूप (बोध-स्वरूप) के द्वारा तथा तादात्म्य (एकात्मता) की प्रतिपत्ति (पहचान) से...