— भोगता है, अनुभव करता है (आत्मनेपद, वर्तमान काल); — परवश — दूसरे के अधीन (विशेषण, कर्ता कारक — समासगत); — भोग, अनुभव, उपभोग (कर्म कारक); — उस (बद्ध) भाव के कारण — पु.पञ्चमी एक. समास; — संसरण करे, चक्र में भ्रमण करे (विधिलिङ्); — इसलिए, अतः (अव्यय); — संसार के विलय की — पु.षष्ठी एक. समास; — उस (शिव या पशु) का — पु.षष्ठी एक.; — कारण, हेतु (कर्म कारक); — हम सम्यक् कहेंगे, घोषित करते हैं (आत्मनेपद, वर्तमान काल, उत्तम पुरुष बहुवचन)
वह परवश (परतन्त्र) होकर भोग का अनुभव करता है, और उसी कारण (बार-बार) संसार में भ्रमण करता है; इस संसृति (संसार-प्रवाह) के प्रलय (निवृत्ति) के कारण को अब हम कहते हैं।