The Heart of Recognition · 1.5

The Heart of Recognition 1.5

1.5
चितिरेव चेतनपदादवरूढा चेत्यसङ्कोचिनी चित्तम् ॥५॥
citir eva cetana-padād avarūḍhā cetya-saṅkocinī cittam
sūtra
— चिति स्वयं ; — ही, मात्र ; — (स्वतन्त्र) चेतन-पद से ; — अवरूढ़, नीचे उतरी हुई ; — ज्ञेय (विषय) से संकुचित होती हुई ; — चित्त — व्यक्तिगत मन कहलाती है

चिति ही चेतन-पद से अवरूढ़ (नीचे उतरी) होकर तथा ज्ञेय (चेत्य) से संकुचित होकर 'चित्त' कहलाती है।