चितिसंकोचात्मा चेतनोऽपि सङ्कुचितविश्वमयः ॥४॥
citi-saṃkocātmā cetano 'pi saṅkucita-viśvamayaḥ
sūtra
चिति के संकोच को अपना स्वरूप बनाने वाला चेतन (जीव) भी संकुचित विश्व से युक्त — अर्थात् विश्व का संकुचित रूप — होता है।
चिति के संकोच को अपना स्वरूप बनाने वाला चेतन (जीव) भी संकुचित विश्व से युक्त — अर्थात् विश्व का संकुचित रूप — होता है।