The Heart of Recognition · 1.4

The Heart of Recognition 1.4

1.4
चितिसंकोचात्मा चेतनोऽपि सङ्कुचितविश्वमयः ॥४॥
citi-saṃkocātmā cetano 'pi saṅkucita-viśvamayaḥ
sūtra
— जिसका स्वरूप चिति का संकोच है ; — चेतन — जीव, अनुभोक्ता ; — भी, तथापि ; — संकुचित, सीमित ; — विश्वमय — विश्व-स्वरूप, विश्व से अभिन्न

चिति के संकोच को अपना स्वरूप बनाने वाला चेतन (जीव) भी संकुचित विश्व से युक्त — अर्थात् विश्व का संकुचित रूप — होता है।