— स्मरण किए जाते हुए पदार्थों के विषय में (सति-सप्तमी); — देखे हुए देश (स्थान) के विषय में (अधिकरण); — मन को छोड़े, हटाये (कर्म + विधि लिङ्); — अपने शरीर को (कर्म — समासगत); — निराधार करके (विशेषण + क्त्वान्त); — वह प्रभु (परम) प्रसरित होता है — कर्ता + वर्तमान काल
स्मरण किए जाते हुए (किसी) पदार्थ के सम्बन्ध में, या देखे हुए देश (स्थान) के सम्बन्ध में मन को छोड़ दे (विषय से हटाये); अपने शरीर को निराधार करके वह प्रभु (परम तत्त्व) प्रसरित होता है। (धारणा ३२)