— क्षुधा आदि के अन्त में (अधिकरण — समासगत); — भय में (अधिकरण कारक); — शोक में (अधिकरण कारक); — गहन (विषाद) में (अधिकरण कारक); — अथवा (अव्यय); — युद्ध से भागते समय (अपादान + विशेषण); — कुतूहल (विस्मय) में — अधिकरण कारक; — क्षुधा आदि के अन्त में (अधिकरण — समासगत); — ब्रह्म-सत्ता के समीप पहुँचने वाली (अवस्था) — कर्ता कारक स्त्रीलिङ्ग — समासगत
क्षुधा आदि के अन्त में, भय में, शोक में, गहन (विषाद) में, युद्ध से भागते समय, कुतूहल (विस्मय) में, और क्षुधा आदि के अन्त में — (चित्त) ब्रह्म-सत्ता के समीप पहुँचता है। (धारणा ३१)