हृदये चित्तसङ्घट्टाद्दृश्यस्वापदर्शनम् ॥१५॥
hṛdaye citta-saṅghaṭṭād dṛśya-svāpa-darśanam
sūtra
हृदय में चित्त के सङ्घट्ट (एकाग्र मिलन) से दृश्य के स्वाप (विलयन) का दर्शन होता है।
हृदय में चित्त के सङ्घट्ट (एकाग्र मिलन) से दृश्य के स्वाप (विलयन) का दर्शन होता है।