— मध्य-जिह्वा में (अधिकरण — समासगत); — मुख विस्तृत खोलकर (समासगत विशेषण); — मध्य में चेतना निक्षिप्त करके (अधिकरण + कर्म + क्त्वान्त); — मानसिक रूप से मन्त्र का उच्चारण करता हुआ (वर्तमान कृदन्त + करण + कर्म); — शिव का ध्यान करता हुआ (कर्म + वर्तमान कृदन्त); — पूर्णतः शान्त हो जाता है (वर्तमान काल)
जिह्वा को मध्य में रखकर, मुख विस्तृत खोलकर, मध्य में चेतना को निक्षिप्त करके, मानसिक रूप से मन्त्र का उच्चारण करते हुए शिव का ध्यान करता हुआ (साधक) पूर्णतः शान्त हो जाता है। (धारणा ८०)