कपालान्तर्मनो न्यस्य तिष्ठन्मीलितलोचनः ।
क्रमेण मनसो दार्ढ्यात्लक्षयेल्लक्ष्यमुत्तमम् ॥९९॥
kapālāntar mano nyasya tiṣṭhan mīlitalocanaḥ |
krameṇa manaso dārḍhyāt lakṣayel lakṣyam uttamam
anuṣṭubh
कपाल के भीतर (मन को स्थापित करके), आँखें मूँदकर, मन की दृढ़ता से क्रमशः उत्तम लक्ष्य (परम तत्त्व) को देखे।