श्रीदेव्युवाच ।
देवदेव त्रिशूलाङ्क कपालकृतभूषण ।
दिग्देशकालशून्या च व्यपदेशविवर्जिता ॥१७॥
śrīdevy uvāca |
devadeva triśūlāṅka kapālakṛtabhūṣaṇa |
digdeśakālaśūnyā ca vyapadeśavivarjitā
anuṣṭubh
— श्रीदेवी ने कहा (परोक्ष भूत); — हे देवों के देव! (सम्बोधन); — हे त्रिशूल-चिह्न से अंकित! (सम्बोधन — समासगत); — हे कपालों से विभूषित! (सम्बोधन — समासगत); — दिशा, देश और काल से शून्य (विशेषण — समासगत); — और (अव्यय); — व्यपदेश (नाम-निर्देश) से रहित (विशेषण — समासगत)
श्रीदेवी ने कहा — हे देवों के देव! त्रिशूल-चिह्न से अंकित, कपालों से विभूषित! (वह परम तत्त्व जो) दिशा, देश और काल से शून्य है, तथा सब व्यपदेश (नाम-निर्देश) से रहित है —