Vijñāna Bhairava Tantra · 1.16

Vijñāna Bhairava Tantra 1.16

1.16
यथालोकेन दीपस्य किरणैर्भास्करस्य च । ज्ञायते दिग्विभागादि तद्वच्छक्त्या शिवः प्रिये ॥१६॥
yathālokena dīpasya kiraṇair bhāskarasya ca | jñāyate digvibhāgādi tadvac chaktyā śivaḥ priye
anuṣṭubh
— जैसे, जिस प्रकार (सम्बन्धवाचक अव्यय) ; — दीपक के प्रकाश से (करण कारक) ; — सूर्य की किरणों से (करण कारक बहुवचन) ; — और (अव्यय) ; — जाना जाता है (कर्मवाच्य वर्तमान) ; — दिशाओं का विभाग आदि (कर्ता कारक — समासगत) ; — उसी प्रकार (अव्यय) ; — शक्ति के द्वारा (करण कारक) ; — शिव (जाना जाता है) — कर्ता कारक ; — हे प्रिये! (सम्बोधन)

हे प्रिये! जैसे दीपक के प्रकाश से और सूर्य की किरणों से दिशा-विभाग आदि जाने जाते हैं, उसी प्रकार शक्ति के द्वारा शिव जाने जाते हैं।