— देह में स्थित सब पदार्थ (कर्म कारक — समासगत); — व्योम (शून्य) से व्याप्त (समासगत विशेषण); — हे मृगनयनी! (सम्बोधन); — भावना करे (विधि लिङ्); — तब उसकी (अव्यय + षष्ठी एकवचन); — वह भावना (कर्ता कारक स्त्रीलिङ्ग); — स्थिर हो जाती है (विधि लिङ्)
हे मृगनयनी! देह में स्थित सब पदार्थों को व्योम (शून्य) से व्याप्त (के रूप में) भावना करे; तब उसकी वह भावना स्थिर हो जाती है। (धारणा २४)