— देह के किसी एक अंश में, शरीर के एक भाग में (अधिकरण — समासगत); — शून्यता ही (कर्ता कारक + अव्यय); — मात्र क्षण-भर के लिए (कर्म कारक — समासगत); — भावना करे (विधि लिङ् — णिजन्त); — निर्विकल्प (विषय) को — कर्म कारक; — वह निर्विकल्प हो जाता है (कर्ता कारक); — निर्विकल्प-स्वरूप का भागी (कर्ता कारक — समासगत)
देह के किसी एक अंश में मात्र क्षण-भर के लिए शून्यता की ही भावना करे; निर्विकल्प (विषय) का (चिन्तन करता हुआ) निर्विकल्प हो जाता है और निर्विकल्प-स्वरूप का भागी बन जाता है। (धारणा २३)