— देह के भीतर (अधिकरण — समासगत); — त्वचा के विभाग को (कर्म कारक — समासगत); — दीवार-स्वरूप, भित्ति की भाँति (समासगत विशेषण); — चिन्तन करे (विधि लिङ्); — उसके भीतर कुछ भी नहीं — कर्ता कारक; — ध्यान करता हुआ (वर्तमान कृदन्त); — अध्येय (ध्येय-रहित परम) का भागी हो जाता है — कर्ता कारक
देह के भीतर त्वचा के विभाग को (मानो) दीवार-स्वरूप चिन्तन करे — उसके भीतर कुछ भी नहीं (है, ऐसा); इस प्रकार ध्यान करते हुए वह ध्येय-रहित (अध्येय परम तत्त्व) का भागी हो जाता है। (धारणा २५)