अद्यापि न निवृत्तो मे संशयः परमेश्वर ।
किं रूपं तत्त्वतो देव शब्दराशिकलामयम् ॥२॥
adyāpi na nivṛtto me saṃśayaḥ parameśvara |
kiṃ rūpaṃ tattvato deva śabdarāśikalāmayam
anuṣṭubh
— आज भी, आज तक (अव्यय); — नहीं (निषेधार्थ अव्यय); — निवृत्त हुआ, हटा (कर्मवाच्य भूत कृदन्त); — मेरा (षष्ठी एकवचन); — संशय, संदेह (कर्ता कारक); — हे परमेश्वर! (सम्बोधन); — क्या? (प्रश्नवाचक); — रूप, स्वरूप (कर्ता कारक); — तत्त्वतः, वास्तव में (क्रियाविशेषण); — हे देव! (सम्बोधन); — शब्द-राशि और कलाओं से बना हुआ — वर्ण-समूह-स्वरूप (समासगत विशेषण)
हे परमेश्वर! फिर भी आज तक मेरा संशय निवृत्त नहीं हुआ — हे देव! वास्तव में (परम तत्त्व का) स्वरूप क्या है? क्या वह शब्द-राशि की कलाओं से बना है (अर्थात् वर्ण-समूह-स्वरूप है)?