— इस प्रकार की (विशेषण स्त्रीलिङ्ग); — भैरव की (षष्ठी एकवचन); — जो अवस्था (सम्बन्धवाचक); — गायी जाती है, प्रशंसित होती है (कर्मवाच्य वर्तमान); — वह परा है (कर्ता कारक स्त्रीलिङ्ग); — पर-स्वरूप के द्वारा, सर्वोच्च रूप से (करण कारक — समासगत); — परा देवी (कर्ता कारक); — प्रकीर्तित है, घोषित की गई है (कर्मवाच्य भूत कृदन्त)
भैरव की जो इस प्रकार की अवस्था गायी जाती है, वह परा है — परम स्वरूप के रूप में वही परा देवी कही गयी है।