जाग्रत्स्वप्नसुषुप्तभेदे तुर्याभोगसम्भवः ॥७॥
jāgrat-svapna-suṣupta-bhede turyābhoga-sambhavaḥ
sūtra
(योगी के लिए) जाग्रत्, स्वप्न और सुषुप्ति के भेद में भी तुर्या (चतुर्थ अवस्था) के आभोग (आनन्द-विस्तार) का सम्भव होता है।
(योगी के लिए) जाग्रत्, स्वप्न और सुषुप्ति के भेद में भी तुर्या (चतुर्थ अवस्था) के आभोग (आनन्द-विस्तार) का सम्भव होता है।