The Heart of Recognition · 1.7

The Heart of Recognition 1.7

1.7
स चैको द्विरूपस्त्रिमयश्चतुरात्मा सप्तपञ्चकस्वभावः ॥७॥
sa caiko dvi-rūpas tri-mayaś catur-ātmā sapta-pañcaka-svabhāvaḥ
sūtra
— वह (प्रमाता) ; — और ; — एक (तत्त्व में) ; — द्विरूप — दो रूप वाला (शिव-शक्ति) ; — त्रिमय — तीन से युक्त (आणव/शाक्त/शाम्भव अथवा तीन मल) ; — चतुरात्मा — चार स्वरूप वाला (चार अवस्थाएँ) ; — सप्त-पंचक — सात पञ्चक ; — स्वभाव वाला है

वह (प्रमाता) एक होते हुए भी द्विरूप (शिव-शक्ति), त्रिमय (तीन मलों या तीन उपायों वाला), चतुरात्मा (चार अवस्थाओं वाला) तथा सप्त-पंचक (सात पञ्चकों) के स्वभाव वाला है।