सर्वज्ञः सर्वकर्ता च व्यापकः परमेश्वरः ।
स एवाहं शैवधर्मा इति दार्ढ्याच्छिवो भवेत् ॥९२॥
sarvajñaḥ sarvakartā ca vyāpakaḥ parameśvaraḥ |
sa evāhaṃ śaivadharmā iti dārḍhyāc chivo bhavet
anuṣṭubh
— सर्वज्ञ (कर्ता कारक); — और सर्वकर्ता (कर्ता कारक — समासगत + अव्यय); — व्यापक परमेश्वर (कर्ता कारक); — वही मैं हूँ — अव्यय + कर्ता + वर्तमान उत्तम पुरुष; — शिव-स्वरूप, शैव-धर्मा (समासगत विशेषण); — इस (भावना) की दृढ़ता से (अव्यय + अपादान); — शिव हो जाता है (कर्ता + विधि लिङ्)
'मैं ही वह सर्वज्ञ, सर्वकर्ता, व्यापक परमेश्वर हूँ; मैं शिव-स्वरूप हूँ' — इस (भावना) की दृढ़ता से (साधक) शिव हो जाता है। (धारणा ७४)