— सहसा, अचानक (अव्यय); — उत्पन्न इच्छा को (कर्म कारक + भूत कृदन्त); — देखकर (क्त्वान्त); — शान्त कर दे, शम को पहुँचाये (कर्म + विधि लिङ्); — जहाँ से ही उत्पन्न हुई थी (अपादान + अव्यय + भूत कृदन्त); — वहीं लीन हो जाती है — अव्यय + वर्तमान कर्मवाच्य
सहसा उत्पन्न इच्छा को देखकर (तत्क्षण) शान्त कर दे; जहाँ से वह उत्पन्न हुई थी, वहीं वह लीन हो जाती है। (धारणा ६१)