— जिस-जिस प्रकार से (अव्यय-युग्म); — जहाँ-जहाँ भी (अव्यय-युग्म); — द्वादशान्त में (अधिकरण — समासगत); — मन को क्षेपण करे, फेंके (कर्म + विधि लिङ्); — प्रति-क्षण (अव्ययीभाव); — क्षीण-वृत्ति वाले के लिए (षष्ठी — समासगत); — वैलक्षण्य, अद्भुत दिव्य-अनुभव (कर्ता कारक); — कुछ दिनों में हो जाता है — करण + विधि लिङ्
जिस-जिस प्रकार से, जहाँ-जहाँ भी द्वादशान्त में मन को क्षेपण करे (फेंके) — प्रति-क्षण क्षीण-वृत्ति (साधक) को कुछ ही दिनों में वैलक्षण्य (अद्भुत दिव्य-अनुभव) प्राप्त होता है। (धारणा २८)