Śiva Sūtras · 2.5

Śiva Sūtras 2.5

2.5
विद्यासमुत्थाने स्वाभाविके खेचरी शिवावस्था ॥५॥
vidyā-samutthāne svābhāvike khecarī śivāvasthā
sūtra
— विद्या-समुत्थान — (शुद्ध) ज्ञान के उदय होने पर (नपुं. एकवचन, अधिकरण कारक, तत्पुरुष समास) ; — स्वाभाविक — स्वाभाविक, सहज (नपुं. एकवचन, विशेषण) ; — खेचरी — खेचरी (चेतना के आकाश में संचार) (स्त्री. एकवचन) ; — शिव-अवस्था — शिव की अवस्था (स्त्री. एकवचन, तत्पुरुष समास)

(शुद्ध) विद्या के स्वाभाविक (सहज) समुत्थान होने पर खेचरी (शुद्ध चेतना के आकाश में संचार) ही शिव-अवस्था है।