विद्यासमुत्थाने स्वाभाविके खेचरी शिवावस्था ॥५॥
vidyā-samutthāne svābhāvike khecarī śivāvasthā
sūtra
(शुद्ध) विद्या के स्वाभाविक (सहज) समुत्थान होने पर खेचरी (शुद्ध चेतना के आकाश में संचार) ही शिव-अवस्था है।
(शुद्ध) विद्या के स्वाभाविक (सहज) समुत्थान होने पर खेचरी (शुद्ध चेतना के आकाश में संचार) ही शिव-अवस्था है।