भूतसन्धानभूतपृथक्त्वविश्वसङ्घट्टाः ॥२०॥
bhūta-sandhāna-bhūta-pṛthaktva-viśva-saṅghaṭṭāḥ
sūtra
(उसे) भूतों के सन्धान (मिलन), भूतों के पृथक्करण और विश्व के साथ सङ्घट्ट (एकीकरण) की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
(उसे) भूतों के सन्धान (मिलन), भूतों के पृथक्करण और विश्व के साथ सङ्घट्ट (एकीकरण) की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।