— छोड़कर (क्त्वान्त); — अपने देह की आस्था को (कर्म — समासगत); — मैं सर्वत्र हूँ — इस प्रकार (वर्तमान उत्तम + अव्यय); — भावना करता हुआ (वर्तमान कृदन्त); — दृढ़ मन से (करण कारक); — दृष्टि से (करण कारक); — अन्य कुछ न देखने वाली (समासगत विशेषण); — सुखी हो जाता है (कर्ता + विधि लिङ्)
अपने देह की आस्था (आसक्ति) को छोड़कर 'मैं सर्वत्र हूँ' इस प्रकार दृढ़ मन से भावना करता हुआ, अन्य कुछ न देखने वाली दृष्टि से (साधक) सुखी हो जाता है। (धारणा ६९)