— भक्ति के उद्रेक (अतिशय) से (अपादान — समासगत); — विरक्त (वैराग्ययुक्त) साधक की — षष्ठी एकवचन; — जिस प्रकार की (सम्बन्धवाचक स्त्रीलिङ्ग); — उत्पन्न होती है (कर्मवाच्य वर्तमान); — मति, बुद्धि (कर्ता कारक); — वह शाङ्करी शक्ति है — कर्ता कारक; — नित्य, सदैव (अव्यय); — उसकी भावना करे (कर्म + विधि लिङ्); — उसी से (वह) शिव हो जाता है — अव्यय + कर्ता कारक
भक्ति के उद्रेक (अतिशय) से विरक्त साधक की जैसी भी मति उत्पन्न होती है — वही शाङ्करी शक्ति है; उसकी नित्य भावना करे, उसी से (वह) शिव हो जाता है। (धारणा ३४)