— जैसी इच्छा हो वैसी प्रार्थना किया गया (कर्ता कारक — समासगत); — धाता — विधाता, पोषक (स्पन्द-तत्त्व) — कर्ता कारक; — जाग्रत् (व्यक्ति) का — षष्ठी एकवचन; — अर्थों (विषयों) को — पु.कर्म बहु.; — हृदय में — नपुं.अधि. एक.; — स्थित, अवस्थित (पु.कर्म बहु. ppp √स्था); — सोम (चन्द्र, अपान) और सूर्य (प्राण) के उदय को — कर्म कारक — समासगत; — करके, उत्पन्न करके (पूर्वकालिक कृदन्त √कृ); — सम्पादित करता है, पूर्ण करता है (प्रेरणार्थक, वर्तमान काल); — देही (देहधारी) के लिए — षष्ठी / सम्प्रदान
जैसे इच्छानुसार प्रार्थित किया गया धाता (स्पन्द-स्वरूप पोषक) सोम-सूर्य (अपान-प्राण) का उदय करके जाग्रत् देही के हृदय में स्थित अर्थों (इष्ट विषयों) को सम्पादित (पूर्ण) कर देता है।