— गुण आदि के स्पन्द-निःस्यन्द — विशेष स्पन्द-प्रवाह (कर्ता कारक बहुवचन — समासगत); — सामान्य स्पन्द के आश्रय से (अपादान कारक — समासगत); — जिन्होंने अपनी सत्ता पा ली है (कर्ता कारक बहुवचन — समासगत); — निरन्तर, सतत (अव्यय); — हों (विधिलिङ्ग, तृ.पु.बहु. √अस्); — ज्ञानी का, जानने वाले का (षष्ठी एकवचन); — अपरिपन्थी — बाधा न डालने वाले (विशेषण, बहुवचन)
गुण आदि के स्पन्द-प्रवाह सामान्य स्पन्द के आश्रय से अपना अस्तित्व पाकर निरन्तर उठते रहते हैं; ज्ञानी के लिए वे कभी बाधक नहीं होते।